"नो स्कूल नो फीस " की मांग को लेकर अभिभावकों ने प्रदेश में लगाया 5 घण्टे का " जनता कर्फ्यू "

 
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--- संयुक्त अभिभावक समिति ने सरकार को दिया 7 दिन का एल्टीमेटम, कहा सरकार जल्द करे निपटारा


जयपुर। संयुक्त अभिभावक समिति ने " नो स्कूल नो फीस " की मांग को लेकर आंदोलन इतना तेज कर दिया है कि सोमवार को अभिभावकों ने स्कूलों की मनमर्जी और सरकार की चुपी के खिलाफ प्रदेशभर में 5 घण्टे का " जनता कर्फ्यू " लगा दिया। 

पिछले 5 महीनों से अभिभावक लगातार स्कूल फीस में राहत की मांग को लेकर स्कूलों के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे साथ ही राज्य और केंद्र सरकार से मुलाकात कर अपनी पीड़ा रख रहे थे, किन्तु इन पांच महीनों में किसी भी सरकार और स्कूल ने अभिभावकों बात नही सुनी, बल्कि इसके उलट अभिभावकों पर फीस वसुली के तरह-तरह के षड्यंत्र रचकर दबाव बनाया गया। 

प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि रविवार को संयुक्त अभिभावक समिति ने व्यापारियों और अभिभावकों व्यापारिक परिस्थितयों को ध्यान में रखकर मात्र 5 घन्टे का स्वेच्छिक एवं सांकेतिक राजस्थान बन्द का आह्वान किया था।

जिसको प्रदेशभर के सभी व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों, दुकानदारों और समाज सेवी संगठनों ने स्वीकार किया और पहली बार देश के इतिहास में स्कूल फीस मुद्दे पर कोई राज्य बन्द हुआ है को पूरा केवल जयपुर ही नही बल्कि किशनगढ़, ब्यावर, अजमेर, भीलवाड़ा, बीकानेर, जोधपुर, चितौड़गढ़, टोंक, झालावाड़, भरतपुर, दौसा, सीकर, फतेहपुर शेखावाटी सहित विभिन्न शहरों में अपना समर्थन दिया है।

संयोजक सुशील शर्मा एवं महामंत्री मनीष विजयवर्गीय ने स्वेच्छिक राजस्थान बंद में सहयोगी रहे राजस्थान के करीब 450 व्यापार मंडलो, सामाजिक संस्थानों, समाज सेवियो एवं सहयोगीयो का आभार ज्ञापित करते हुवे कहा कि अभी तो यह अंगड़ाई है, जब तक सरकार अभिभावकों की बात नही सुनती है आवश्यतानुसार आगे भी इसी संघर्ष जारी रहेगा।

हमारी ये मुहिम फीस माफी के साथ साथ शिक्षा की दुकानें बन चुके स्कूलो को पुनः मंदिर बना इनके जीर्णोद्धार की है, अतः सब साथ बने रहे अब किसी भी अभिभावक एवं विद्यार्थी के साथ अन्याय नही होने दिया जाएगा।

प्रवक्ता अरविंद अग्रवाल ने बताया कि कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन से सभी तरह के व्यापारिक संकट उभरकर पूरे देश के सामने आए है, ना रोजगार है ना व्यापार है। 

दुकानों पर कस्टमर नही है, काम करने वाली तनख्वाह नही मिल रही है, बहुत से अभिभावक आधी सैलरी पर काम करने पर मजबूर हो रहे है ऐसे अभिभावक अपने परिवार का पालन - पोषण की चिंता करे या स्कूल फीस जमा करवाने की चिंता करे। निजी स्कूल संचालकों का फीस मांगना पूरी तरह से नाजायज है, जब स्कूल खुले ही नही तो फीस किस बात की देंवे। 

रविवार को राजस्थान बन्द की घोषणा करने के लिए निजी स्कूल, राज्य और केंद्र सरकार ने मजबूर किया है, अगर जिम्मेदार लोग अभिभावकों की पीड़ाओं को समझते उनके दुःख-दर्द के सहभागी बनते तो यह नोबत नही आती। 

रविवार को हुए राजस्थान बन्द के बाद संयुक्त अभिभावक समिति राज्य सरकार को 7 दिनों का एल्टीमेटम देती है और आग्रह करती है कि वह अभिभावकों की पीड़ाओं को समझे और अभिभावकों और स्कूलों के बीच खिंचती लम्बी दीवार को हटाने का काम करे अन्यथा गम्भीर परिणाम देखने को मिलेंगे, अभी अभिभावकों ने स्वेच्छिक बन्द रखकर अपना रोष दिखाया, अगली बार पूरा राजस्थान सड़कों पर होगा।

प्रवक्ता ईशान शर्मा ने बताया कि संयुक्त अभिभावक समिति केवल आंदोलन की राह पर नही चल रही है वह कोर्ट में भी जा रही है। 

नो स्कूल नो फीस मुद्दे को लेकर समिति संयोजक सुशील शर्मा द्वारा मई माह में 8 राज्यो की रिट सुप्रीम कोर्ट में लगाई थी, किन्तु सुप्रीम कोर्ट ने इसे रिजेक्ट कर सम्बन्धित राज्यों में रिट लगाने के निर्देश दिए थे। 

समिति ने निर्णय लिया कि संयोजक सुशील शर्मा और एडवोकेट अमित छंगाणी स्कूल फीस मुद्दे को लेकर पूरा लीगल प्रोसीजर देखेंगे। 

ईशान शर्मा ने बताया कि वर्ष 1993 से सुशील शर्मा स्कूल फीस मुद्दों को लेकर लड़ाई लड़ रहे है, इसके निर्देशन में ही जयपुरिया स्कूल, मालवीय नगर को 3 महीने तक बन्द करवाया गया था और बढ़ाई फीस को वापस लेने पर मजबूर किया गया था।

समिति सदस्य अमृता सक्सेना और दौलत शर्मा ने बताया कि आज महिलाओं को दोहरा संघर्ष करना पड़ रहा है ठप पड़े व्यापार के कारण घर खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है तो दूसरी तरफ स्कूल वाले धमकियां देकर फीस की डिमांड कर रहे है। 

अब पहले से ही विभिन्न समश्याओ से पीड़ित है अब स्कूल संचालक भी आए दिन फीस जमा करवाने के धमकियां दिए जा रहे है। 

जयपुर में यहाँ रहे बाजार बंद

प्रवक्ता मनोज शर्मा और कोषाध्यक्ष संजय गोयल ने बताया कि सोमवार को बहुत से व्यापारियों ने स्वेच्छा से पूरे दिन का बन्द रखकर इस आंदोलन का समर्थन किया, किन्तु समिति द्वारा जौहरी बाजार, किशनपोल, चौड़ा रास्ता, त्रिपोलिया, संजय बाजार, चांदपोल, गणगौरी बाजार, रामगंज बाजार, सुभाष चौक, मुरलीपुरा, वीकेआई, दादी का फाटक, सिरसी रोड़, खिरनी फाटक, वैशाली नगर, गांधी पथ, मानसरोवर, थड़ी मार्किट, जगतपुरा, मालवीय नगर, त्रिवेणी नगर, बजाज नगर, टोंक रोड़, राजापार्क, ट्रांसपोर्ट नगर, जवाहर नगर सहित शहरभर के सभी व्यापारियों और दुकानदरों ने अपने प्रतिष्ठान को पांच घण्टे बन्द रखकर इस आंदोलन को समर्थन दिया केवल यही नही नोकरी करने वाले अभिभावकों ने भी ऑफिसों से अवकाश लेकर इस बन्द को फसल बनाया। 

ऑनलाइन क्लास का किया बहिष्कार

संयुक्त अभिभावक समिति द्वारा घोषित राजस्थान बन्द को समर्थन देने के लिए अभिभावकों ने ना केवल बाजार बंद रखे बल्कि स्कूलों द्वारा संचालित ऑनलाइन क्लास का भी पूरी तरह बहिष्कार किया। 

बन्द के दौरान समिति पदाधिकारियों और सदस्य सर्वेश मिश्रा, सत्यनारायण प्रधान बागड़ा, चंद्रमोहन गुप्ता, हरिदत्त शर्मा, मनोज कुमार सहित सभी सदस्यों ने बाजारों में घूमकर बन्द का जायजा लिया।

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