अफसरशाही के चलते 9 साल से 6000 शिक्षक मानसिक पीड़ा से गुजर रहे हैं



Rajasthan ka Master: राज्य की अनुदानित शिक्षण संस्थाओं के लगभग 6000 शिक्षक एवं कर्मचारियों का करीब 9 वर्ष पहले 1 जुलाई 2011 में राजकीय सेवा में समायोजित किया गया था। अनुदानित शिक्षण संस्थाओं के शिक्षकों एवं कर्मचारियों को मानसिक उत्पीड़न और आर्थिक शोषण से मुक्ति दिलाने की दिशा में यह बड़ा कदम था। तब शिक्षकों ने इसको एक ऐतिहासिक एवं क्रांतिकारी कदम बताया था।

समायोजित शिक्षक एवं कर्मचारी त​ब सरकार के इस कार्य से काफी खुश थे। किंतु आज 9 साल होने के बाद भी समायोजित शिक्षक भारी मानसिक उत्पीड़न एवं उपेक्षा के शिकार हैं। जानकारी के अनुसार योग्य एवं अनुभवी तथा पदोन्नति की पात्रता रखते हुए भी 9 वर्ष बीत जाने के बाद इन 6000 सरकारी कर्मियों को आजतक भी पदोन्नति के अवसर प्रदान नहीं किए जा रहे हैं।

अखिल राजस्थान शिक्षक कर्मचारी महासंघ समायोजित के प्रदेश अध्यक्ष अशोक शर्मा का कहना है कि सरकार यदि समायोजित शिक्षकों एवं कर्मचारियों को पदोन्नति के अवसर प्रदान करती है तो इससे सरकार पर एक रुपए का भी अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा, क्योंकि वर्तमान में एक तृतीय श्रेणी का समायोजित शिक्षक एक व्याख्याता के बराबर ग्रेड पे प्राप्त कर रहा है।

उन्होंने बताया कि एक द्वितीय श्रेणी का शिक्षक, एक सेकेंडरी प्रधानाध्यापक का ग्रेड पे प्राप्त कर रहा है और एक समायोजित व्याख्याता प्रधानाचार्य का ग्रेड पे प्राप्त कर रहा है। सभी को लगभग 9, 18, 27 और 10, 20, 30 का लाभ मिल चुका है।

दूसरी ओर इन 6000 शिक्षकों एवं कर्मचारियों में से पदोन्नति की बाट देखते—देखते लगभग आधे कर्मचारी तो या तो रिटायर हो चुके हैं या रिटायर होने वाले हैं। इस बाबत समायोजित शिक्षक एवं कर्मचारियों ने उच्च न्यायालय जोधपुर में एक रिट याचिका भी दायर की थी।

जिसमें न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश देते हुए कहा था कि समायोजित शिक्षक एवं कर्मचारी पुरानी पेंशन पाने के हकदार हैं एवं सरकार इन्हें पदोन्नति के अवसर प्रदान करने एवं शहरी इलाकों में स्थानांतरण करने के लिए सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाए।

इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय ने भी राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर का आदेश यथावत रखा। परंतु राज्य की नौकरशाही समायोजित शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने, इन्हें पदोन्नति के अवसर प्रदान करने और शहरी इलाकों में स्थानांतरण करने आदि मांगों पर रोड़ा अटका रही है।

अशोक शर्मा का कहना है कि निरंतर रूप से विगत 9 वर्ष से जो भी सरकारें आईं, उन सब से गुहार लगाते आ रहे हैं। इस बाबत मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख शिक्षा शासन सचिव, सभी को समय-समय पर ज्ञापन देते आ रहे हैं, लेकिन 9 वर्ष के उपरांत भी आज तक हमारी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया है।

शर्मा का कहना है कि पूर्ववर्ती भाजपा की वसुंधरा राजे सरकार के मंत्रियों से जब मिले तो उनका यह कहना था कि 'आप लोगों का समायोजन कांग्रेस सरकार ने किया था, हम कुछ नहीं कर सकते।' लेकिन जब 2018 में वर्तमान कांग्रेस सरकार अस्तित्व में आई तो हमारी खुशियों का ठिकाना नहीं रहा।

उनका कहना है कि 'हमने सोचा था कि अब हमारी मांगों का निस्तारण होगा, किंतु वर्तमान सरकार भी हमारी मांगों के प्रति उदासीन है। ऐसे में शिक्षक काफी निराश हैं और मानसिक वेदना से गुजर रहे हैं, जिसको निस्तारण सरकार को जल्द से जल्द करना चाहिए।'

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