सीबीएससी 9वीं और 11वीं में अब एडमिशन मुश्किल


—बोर्ड की अनुमति से ही होगा एडमिशन

जयपुर

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबंधित स्कूलों में अब कक्षा नवीं और ग्यारहवीं में प्रवेश लेना आसान नहीं होगा। बोर्ड की ओर से रविवार को विशेष गाइड लाइन जारी होने के बाद स्कूल हर एडमिशन बोर्ड की अनुमति के बाद ही कर सकेगा।

इस प्रक्रिया के तहत एक लंबी प्रक्रिया के बाद इस सत्र से लागू बंदिश में स्कूल बदलने के कारण का शपथ पत्र भी अभिभावकों की ओर से स्कूल प्रबंधन को देना आवश्यक होगा।

अभिभावक खराब पढ़ाई के चलते यदि अपने बच्चे का स्कूल बदल रहे हैं तो स्कूल बदलने के कारण को भी अभिभावकों को साबित करना होगा।

बोर्ड सूत्रों ने बताया कि यह नई व्यवस्था अभिभावकों और स्टूडेंट्स के लिए उलझन बढ़ाने वाली होगी। एडमिशन की लंबी प्रक्रिया के बाद यदि बोर्ड ने स्वीकृति नहीं दी तो बच्चों को पढ़ाई का नुकसान होने की आशंका हमेशा बनी रहेगी।

इस नई गाइडलाइन में स्कूल बदलने की जो रियायतें दी गई है उन्हें भी मय कागज सबूत के  अभिभावकों की ओर से पेश करना जरूरी होगा।
गौरतलब है कि पहले इन दोनों क्लासों में एडमिशन आसान था जिसे अब बोर्ड की ओर से बहुत ही जटिल बना दिया गया है।

सूत्रों ने बताया कि स्कूलों में 10वीं व 12वीं के लिए यह व्यवस्था पहले से ही थी तो, इससे जुड़ी नवी और ग्यारहवीं कक्षा को भी इनके साथ किया जाना जरूरी हो गया था।

निर्धारित संख्या से अधिक एडमिशन नहीं दे सकेंगे स्कूल
सीबीएसई की गाइड लाइन के अनुसार तय संख्या से एक भी बच्चा अधिक क्लास में नहीं बैठ सकेगा। यानी किसी स्कूल के नौवीं कक्षा में 2 सेक्शन है और दोनों में ही 4040 बच्चे हैं तो एक भी बच्चे को एडमिशन देने का मतलब तीसरा सेक्शन होगा। ऐसे में निर्धारित संख्या से अधिक पर एडमिशन भी मुश्किल होगा।

स्कूल नहीं कर सकेंगे एडमिशन में गड़बड़ी
सीबीएसई बोर्ड ने सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों से इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी करने पर सख्त कार्यवाही की चेतावनी जारी की है, पर ऑनलाइन सिस्टम में इसकी संभावना शून्य बनी हुई है। पूरा प्रोसेस ऑनलाइन होगा।

बच्चों के पेरेंट्स सभी आवश्यक दस्तावेज में शपथ पत्र ऑनलाइन ही बोर्ड में पेश करेंगे। यदि कोई स्कूल गड़बड़ कर के दो-तीन एडमिशन गुपचुप तरीके से कर भी लेगा तो उनका एनरोलमेंट रजिस्ट्रेशन कैसे होगा। यह प्रक्रिया अपने आप गड़बड़ी का खुलासा कर देगी। इसलिए इसमें चोरी-छिपे एडमिशन स्कूल प्रबंधन की ओर से नहीं हो सकेंगे।

प्रवेश में इनको मिलेगी प्राथमिकता
बोर्ड सूत्रों ने बताया कि गाइडलाइन के अनुसार पेरेंट्स के नौकरी अथवा बिजनेस ट्रांसफर और आवाज बदलने या फिर बच्चे के हॉस्टल से घर पर रहने की अनिवार्यता को प्रमुखता दी गई है। इसके साथ पुराने स्कूल में आगे की कक्षा नहीं होना या फिर इच्छित सब्जेक्ट नहीं होने के कारण भी एडमिशन में सहायक सिद्ध होंगे।

स्कूल दूर होना या फिर उसमें पढ़ाई अच्छी न होने को भी इसका आधार बनाया गया है। हालांकि अभिभावकों को यह दावा करना होगा कि पुराने स्कूल में पढ़ाई सही नहीं होने की वजह से वे स्कूल बदल रहे
इसमें पुराना स्कूल संचालक प्रिंसिपल से भी बच्चे की पढ़ाई पर टिप्पणी ली जाएगी।

ऐसी स्थिति में यह मामला थोड़ा अधिक मुश्किल हो गया है। क्योंकि कोई स्कूल अथवा नया स्कूल जहां प्रवेश बच्चे को प्रवेश मिल रहा हो, इस तरह के विवाद को पैदा करेंगे। जबकि बोर्ड में एडमिशन के कारण इसे भी अहम माना गया है।

हर नए छात्र की बनेगी फाइल
बोर्ड अधिकारियों ने बताया कि किसी दूसरे स्कूल से एडमिशन के लिए आए हर स्टूडेंट की फाइल बनेगी। पहले चरण में तो संबंधित प्रिंसिपल यह जांच लेगा कि बच्चे का किस क्राइटेरिया में प्रवेश हो सकता है।

बिना किसी कारण बच्चे के अभिभावक को एडमिशन देने से मना कर दिया जाएगा। नियम शर्तों के अनुसार स्टूडेंट के फॉर्म भरने के साथ संबंधित दस्तावेज व दो शपथ पत्र पेश होंगे।

20 दिन से अधिक लगेगे एडमिशन में
बोर्ड की ओर से एडमिशन की स्वीकृति में 20 दिन से अधिक का समय लगेगा। यह सब प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। सूत्रों ने बताया कि एडमिशन से जुड़े कई मामले पूर्व में कोर्ट जा चुके हैं। इसके बाद बोर्ड ने गाइडलाइन जारी की है।

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