1 लाख 3 हजार स्कूलों के विद्यार्थी जुड़ेंगे ई-शिक्षा प्रोजेक्ट से



Rajasthan  ka Master:देश का पहला ई-शिक्षा प्राेजेक्ट तैयार, आरबीएसई व सीबीएसई का 12वीं तक पूरा पाठ्यक्रम, एनसीईआरटी काेर्स से देश के सभी राज्यों में कक्षा 6 से 12 तक पढ़ने वाले बच्चाें को होगा फायदा, ऑडियाे-वीडियाे में 1 कराेड़ 70 लाख बच्चाें काे ई शिक्षा प्रोजेक्ट का मिलेगा फायदा, निदेशक सौरभ स्वामी के नेतृत्व में दो हजार शिक्षकों की, टीम कर रही काम, एनसीईआरटी काेर्स हाेने से देश के सभी राज्यों में कक्षा 6 से 12 तक पढ़ने वाले बच्चाें के लिए होगा उपयाेगी, काेराेना महामारी की वजह से राज्य सहित देशभर के स्कूलाें में विद्यार्थियों की छुट्टियां चल रही हैं।


ऐसे में शिक्षा विभाग प्रदेश के सरकारी व गैर सरकारी 1 लाख 3 हजार स्कूलाें के 1 कराेड़ 70 लाख विद्यार्थियों के लिए मिशन ज्ञान और केयर्न फाउंडेशन के साथ डिजिटल शिक्षा काे लेकर देश का पहला पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर रहा है।


खास बात यह कि इससे प्रदेश का एक भी विद्यार्थी शिक्षण से वंचित नहीं रह पाएगा। इस प्रोजेक्ट पर निदेशक सौरभ स्वामी के नेतृत्व में पूरी टीम काम कर रही है। जल्द ही इसे शुरू किया जाएगा।


खास बात यह है कि इसमें कक्षा 6 से 12 तक की सभी विषयों की किताबों के सभी चैप्टर की ई-लाइब्रेरी बनाने के साथ वीडियो के माध्यम से चैप्टर तैयार किए जा रहे है।

इसमें यू-ट्यूब पर चैनल व मोबाइल के साथ-साथ बिना इंटरनेट के लिए हार्ड डिस्क की सुविधा भी हाेगी।


मिशन ज्ञान व वेदांता का प्रोजेक्ट

इस प्रोजेक्ट पर मिशन ज्ञान के जिनेंद्र साेनी की टीम भी काम कर रही है। साेनी वर्ष 2019 से ही निशुल्क डिजिटल शिक्षण पर काम कर रहे है।

वेदांता केयर्न ऑयल एंड गैस लिमिटेड की हरमीत सेहरा ने कहा कि प्रोजेक्ट ई-कक्षा के जरिए। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उच्च शिक्षा प्रत्येक छात्र तक पहुंचे।


प्रदेश में कुल स्कूल

68000 सरकारी स्कूल

35000 निजी स्कूल

1.70 करोड़ कुल विद्यार्थी

साक्षात्कार : 2 हजार से अधिक शिक्षकों ने ऑनलाइन साक्षात्कार में भाग लिया।

एक्सपर्ट की टीम

1 हजार के साथ-साथ 40 की टाॅप एक्सपर्ट टीम भी


कब शुरू हाेगा

अगले दाे माह में प्रदेश की प्रत्येक स्कूल तक पहुंचेगा।

क्योंकि, अभी काफी चैप्टर तैयार हैं, शेष पर काम चल रहा है।


फायदा क्या

आरबीएसई के साथ सीबीएसई के स्टूडेंट्स भी पढ़ेंगे।


देश का पहला प्रोजेक्ट

1. 1 लाख 3 हजार स्कूलाें में ई-लाइब्रेरी

इस प्रोजेक्ट के माध्यम से प्रदेश की 1 लाख 3 हजार स्कूलाें में ई-लाइब्रेरी बनेंगी। इसमें कक्षा 6 से लेकर 12 तक के सभी विषयों के वीडियाे-ऑडियाे कंटेंट तैयार किए गए हैं। यह लाइब्रेरी अगले दो माह में सभी स्कूलों तक पहुंच जाएगी।


2. बिना इंटरनेट भी सुविधा

गांवों में इंटरनेट की समस्या आती है। ऐसे में संस्थाप्रधानों काे सभी कक्षाओं का पाठ्यक्रम हार्ड डिस्क में भी उपलब्ध कराया जाएगा। ताकि इंटरनेट नहीं हाेने पर सीधे कंप्यूटर पर ऑफलाइन किसी भी चैप्टर काे लगाकर शिक्षक अध्ययन करा सकेंगे।


3. यू-ट्यूब और मोबाइल पर बनाया चैनल

इसके लिए यू-टयूब पर चैनल RBSE E KAKSHA बनाया गया है।

साथ ही मोबाइल एप्लीकेशन तैयार की गई है। इससे निजी स्कूलाें वालाें काे भी फायदा हाेगा। इन चैनल पर करीब दाे हजार से अधिक वीडियो अपलोड किए जा रहे हैं।


4. दूरदर्शन व वाट्सएप पर भी लिंक

ई-शक्षा के लिए प्रदेश के सभी शिक्षकों काे इसका लिंक भेजा जाएगा। इसमें विषयवार व चैप्टर वार वीडियो तैयार हैं, जिसे शिक्षक कभी भी पढ़ा सकेगा। इसके साथ ही दूरदर्शन पर भी इसकाे चलाया जाएगा। दूरदर्शन पर शिक्षा वाणी व शिक्षा दर्शन नाम से कार्यक्रम चलाया जाएगा।


5. ग्राम पंचायतों पर टीवी डिसप्ले

प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में अवकाश के दाैरान भी सोशल डिस्टेंसिंग रखते हुए बच्चाें काे बैठाकर टीवी डिसप्ले पर इनकाे चलाया जाएगा। इसके साथ ही गांवों में राजीव गांधी सेवा केंद्रों पर भी विशेष कक्षाओं के साथ बच्चों के लिए इनको डिस्प्ले किया जाएगा।


प्रोजेक्ट का 5 सिंतबर काे शुभारंभ हाेना था। लेकिन काेराेना की वजह से निरस्त कर दिया। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन के कारण भी इसे टाल दिया गया। अगले कुछ दिनों में इसे शुरू करने की तैयारी है। 


सभी सरकारी व गैर सरकारी स्कूलाें के बच्चाें के लिए यह तैयार किया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट देश का पहला हाेगा। निदेशक सौरभ स्वामी के नेतृत्व में प्रदेशभर के शिक्षकों का साक्षात्कार लेकर चयन किया गया। सभी विषयों के टाॅप एक्सपर्ट की टीमें तैयार की गई।


इनका कहना है

5 स्टूडियो में शूटिंग व प्रशिक्षण, इंटरनेट नहीं होने पर भी हार्ड डिस्क से पढ़ाई होगी।

काेराेना के चलते स्कूलें बंद हाेने से बच्चाें के शिक्षण पर पड़े प्रभाव के बाद इस प्रोजेक्ट काे लॉन्च करने की तैयारी है। इसमें काफी मेहनत की गई है, ताकि काेई भी चैप्टर नहीं छूटे। यह प्रदेश के साथ-साथ देश में भी पायलट प्रोजेक्ट के रूप में काम आएगा। प्रत्येक बच्चे काे अब डिजिटल शिक्षा मिलेगी। इंटरनेट नहीं हाेने के बाद भी टाॅप टीम हार्डडिस्क के साथ काम करेगी। 

-साैरभ स्वामी, निदेशक शिक्षा विभाग

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