बीएसटीसी के 3 लाख अभ्यर्थियों के भविष्य पर शिक्षा मंत्री ने लटकाई तकवार, भारी पड़ेगा यह वार


Rajasthan ka master: राज्य की सरकार के द्वारा 25 अप्रैल को राजस्थान में रीट का एग्जाम कराने की घोषणा की है। हालांकि इस एग्जाम को तीसरी बार तारीख के जरिए आगे किसका या गया है।

लेकिन इससे पहले ही इस महत्वपूर्ण परीक्षा को लेकर राजस्थान भर से 300000 अभ्यर्थियों ने गहरा रोष व्यक्त किया है।  इन 300000 अभ्यर्थियों ने राज्य के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को भी सड़क पर रोककर खरी-खोटी सुनाई है।

दरअसल राज्य सरकार के द्वारा जिन 31000 पदों को भरने के लिए रीट परीक्षा आयोजित करने की घोषणा की है, उसमें करीब 11 लाख अभ्यर्थी बैठेंगे। यह 1100000 अभ्यर्थियों में से करीब 300000 अभ्यर्थी बीएसटीसी के हैं और 800000 अभ्यर्थी बीएड धारी हैं।

पिछले दिनों शिक्षा मंत्री ने कहा था कि रीट लेवल प्रथम के लिए पहली बार बीएसटीसी के साथ ही बीएड धारी अभ्यर्थियों को भी मौका दिया जाएगा। इससे पहले रीट लेवल प्रथम के लिए केवल बीएसटीसी वाले ही योग्य माने जाते थे।

शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के इस ऐलान के साथ ही राजस्थान के तीन लाख से ज्यादा बीएसटीसी डिग्री धारी अभ्यार्थियों में गहरा रोष है। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा उनके भविष्य के साथ जानबूझकर खिलवाड़ कर रहे हैं।

 इसी सिलसिले में 2 दिन पहले जब प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी अजय माकन और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा दोनों कोटा दौरे पर गए थे, तब रास्ते में ही बीएसटीसी के डिग्री धारी अभ्यार्थियों के द्वारा उनके काफिले को रोककर उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई थी।

2 साल बाद रीट परीक्षा का आयोजन हो रहा है और इसमें भी विवाद होने के कारण प्रकरण न्यायालय में जा सकता है। ऐसे में बीएसटीसी और बीएड धारी अभ्यर्थियों को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं यह परीक्षा एक बार फिर आगे नहीं खिसक जाएगी।

 इस विवाद को लेकर राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के अध्यक्ष उपेन यादव का कहना है कि सरकार को न्याय संगत फैसला करना चाहिए, किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए, सरकार बेरोजगारों के पक्ष में फैसला करके जल्द से जल्द उनको नौकरी देने का काम करे।

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