वरिष्ठ अध्यापक के तबादलों को खोलने की मांग करने वाले शिक्षक नेता का निलंबन!

-वरिष्ठ अध्यापको के केंद्रीकृत तबादले (सीकर) करने वाले निर्देशक सही सलामत! मुख्यमंत्री से शिक्षक नेता की ससम्मान बहाली की मांग :अरस्तु 

अखिल राजस्थान विद्यालय शिक्षक संघ (अरस्तु) ने माननीय मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया है। ज्ञापन में कहा गया राज्य सरकार अभीतक शिक्षक कर्मचारियों द्वारा अपनी मांग को लेकर धरना/अनशन /प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध नही लगा रखा। 

खेदजनक स्थिति है निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण कर वरिष्ठ अध्यापक व शिक्षक नेता हरपाल दादरवाल को निलंबित कर दिया गया है।

शिक्षक का कसूर था, संविधानिक प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए वरिष्ठ अध्यापकों के तबादले खोलने की मांग लेकर अनशन पर बैठना। दादरवाल ने शांति भंग नहीं की, नहीं शायरी नक्सलवादी, नहीं आतंकवादी था। गांधीजी के विचारों पर चलने वाला एक अनशन कारी शिक्षक था। 

आगे कहा निदेशक माध्यमिक शिक्षा पर ऎसा कौनसा दबाव रहा कि  संयुक्त निदेशक स्कूल शिक्षा जयपुर संभाग उपस्थित होते हुए भी मजबूरन निदेशक को निलंबन आदेश निकालना पड़ा था।  

संगठन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपने विरोधियों पर ईडी आयकर के छापे मारकर उन्हें हतोत्साहित करती रहती है।

लगभग उसी पथ पर चलते हुए प्रदेश का शिक्षा विभाग वरिष्ठ अध्यापक को प्रताड़ित हतोत्साहित करके के लिए निलंबन कार्यवाही की है, ताकि कोई अन्य शिक्षक नेता आवाज नउठा सके। यही दर्शाता है दोनों सरकारों में कोई खास अंतर नहीं है। 

शिक्षक नेता के निलंबन से कोई डरने वाला नहीं

धरना - प्रदर्शन के लिए विभाग की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती आवश्यकता है तो स्थानीय पुलिस प्रशासन? संगठन ने कहा की सबसे पहले राज्य सरकार को निदेशक माध्यमिक शिक्षा पर निलंबन की कार्य करना चाहिए था? 

उन्होंने सीकर को ही प्रदेश मानकर वरिष्ठ अध्यापकों के तबादले किए थे, वह सही था तो पूरे प्रदेश के वरिष्ठ अध्यापकों के तबादले खोलने की मांग करना गलत कैसे ठहराया जा सकता है। 

लगता है कि स्कूल शिक्षा विभाग वर्तमान सरकार के लिए दिन पर दिन परेशानियां पैदा करने के लिए उल जलूल आदेश निकालकर कर 300000 शिक्षकों को सरकार के विरुद्ध खड़ा करना चाह रही है।  

मुख्यमंत्री से पुरजोर शब्दों में मांग की है कि शिक्षक नेता हरपाल दादरवाल को  ससम्मान बहाल करवाएं।  निदेशालय को  निर्देशित करें कि मधुमक्खी छत्ते पर (300000 शिक्षक) पत्थरबाजी (उलूलजलूल आदेश) न करें। 

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